मेरी बेंगलुरु ट्रिप
१४.मेरी बेंगलुरु ट्रिप
- वैशाली सुरवसे
मेरे गांव का नाम कानेगांव है। मेरे घर आई, बाबा, मेरा बड़ा भाई और मेरी छोटी बहन रहती है। मेरे बाबा किसान है।मैं हिंदी विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हूं।जब मैं कनिष्ठ विद्यालय में थी तब मेरी एक विज्ञान विषय से संबंधित ट्रिप चयन हुआ।
हमारे देश को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन हम उसे [ISRO]इस नाम से भी जानते हैं। जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित है। वहां 5 दिनों के लिए मेरा शैक्षिक यात्रा के लिए चुना हुआ। मेरे कनिष्ठ विद्यालय का नाम प्रियदर्शनी माध्यमिक विद्यालय साकोळ है। वहां मैं जनरल साइंस में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। जब मैं 12वीं कक्षा में थी तब मैं और मेरी एक सहेली अस्मिता मोटाडे और हमारे विद्यालय की प्राध्यापिका संतोषी पाटिल मैडम की मदद से एक विज्ञान प्रदर्शन में भाग लिया। वहां हमने स्पाइडर वनस्पति पर प्रयोग किया था।
स्पाइडर वनस्पति [Cholorophytum Comosum] जिसे हम 'मकड़ी का पौधा' इस नाम से भी जानते हैं। स्पाइडर वनस्पति एक लोकप्रिय और आसानी से उगने वाला घरेलू पौधा है। जो हवा को शुद्ध करता है और हमारे घर को नकारात्मक ऊर्जा से दूर भागता है। वह हमें जिला स्तर पर प्रयोग के लिए चुना गया। वहां से ही हमें बेंगलुरु ट्रिप के लिए चयन किया। छात्राओं को मार्गदर्शन के लिए भी कुछ प्रोफेसर का भी चयन किया गया। इसमें में मेरी सहेली और हमारे प्राधिपिका पाटिल मैडम का भी चयन हुआ।
यह ट्रिप हम छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई। बेंगलुरु में हम गोल्डन होटल में रुके थे। वहां की सुविधा बहुत अच्छी तरह से की गई थी। सबसे पहले हमें वह लाल बाग की सेर करने का अवसर मिला। लालबाग एक बोटैनिकल गार्डन है 240 एकड़ जमीन का वनस्पति उद्योग है और वह दक्षिण बेंगलुरु में स्थित है।
लालबाग को अंग्रेजी में उसे 'रेड गार्डन' नाम से भी जाना जाता है। यहां साल में दो बार पुष्प प्रदर्शनियों का आयोजन भी किया जाता है। इसमें हजार से अधिक छोटी मोटी प्रजाति है यहां है जिससे 100 साल से अधिक पुराने पेड़ भी शामिल है। इस उद्यान के रंग बिरंगी पुष्प देखकर बहुत अच्छा लगा। हमने कभी इसका नाम भी सुना नहीं सुना था वैसे बहुत सारे पुष्प वहां देखने को मिले। वहां का माहौल पुष्प की वजह से सुगंधित हो गया था।
इसके बाद हम म्यूजिकल फाउंटेन देखने के लिए इंदिरा गांधी पार्क में चले गए। जब हम वहां गए तब समय रात का था, इसलिए वह खूबसूरती एक अलग ही तरह की थी। जल और प्रकाश संगीत के ताल पर नृत्य कर रहे थे। वहां पर भी हजारों पौधों की प्रजातियां, औषधीय पौधे, फूल वाले पौधे थे। वहां का माहौल बहुत ही अच्छा और दिल को छू लेने वाला था।
बाद में हम भारतीय अंतरिक्षअनुसंधान संगठन [ ISRO] जो भारत की अंतरिक्ष एजेंसी है वहां चले गए। इसका बेंगलुरु में मुख्यालय है। वहां बड़े-बड़े सेटेलाइट के कही सारे पार्ट्स देखने को मिले। वहां हमने राइट्स बंधु यानी राइट्स ब्रदर्स के द्वारा जो हवाई जहाज बनाया गया वह देखने को मिला। वहां बेंगलुरु में उपग्रहों की डिजाइन और विकास किया गया जाता है। वहां पर हम उपग्रह को अपेक्षित कक्षाओं में स्थापित करने के लिए उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी और जीएसएलवी विकसित किए गए हैं।वहां का माहौल शांत था। मुझे वहां का अनुशासन बहुत अच्छा लगा। सेटेलाइट के बारे में हमें जो ज्ञात नहीं था वह ज्ञात हुआ और बहुत सारे पार्ट्स देखने को मिले। यह मेरे जीवन की अविस्मरणीय ट्रिप थी।
ऐसी ट्रिप के आयोजन से छात्र में आत्मविश्वास की वृद्धी होती हैं । हर दिन के छोटे – मोटे काम करने का तरीका एक नई तरह से सोच सकते हैं। श्रद्धा और अंधश्रद्धा को खुद परक सकता है। ऐसे एकत्रित ट्रिप के कारण छात्रों में संघीक भावना निर्माण होती हैं। एक दूसरे की मदद करने तथा समस्याएं समझने को मिलती है। यदि किसी को कोई समस्या है तो सभी को मिलकर उसका समाधान करना चाहिए। विज्ञान हमें दुनिया के बारे में नई चीजें जानने और समझने में मदद करता है, जिससे हम बेहतर जीवन जी सकते हैं और समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। विज्ञान के कारण नए आविष्कार और प्रौद्योगिकियां विकसित होती हैं, जिससे जीवन बेहतर होता है। विज्ञान हमें समस्याओं को हल करने और बेहतर समाधान खोजने में मदद करता है।
इस यात्रा में मुझे बहुत कुछ नया सीखने को मिला। ऐसी यात्राएं छात्र के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसी यात्राओं के कारण छात्रों की कौशल में वृद्धि होती है। यात्राओं के माध्यम से किसी चीज की और देखने का नजरिया भी बदल जाता है। सरकार को भी छात्रों के लिए ऐसी ट्रिप पर बारंबार आयोजित करनी चाहिए ऐसा मुझे लगता है।
नाम: वैशाली शिवाजी सुरवसे
कक्षा : एम.ए. द्वितीय वर्ष [हिंदी]
२०२४-२०२५
ब्लॉग समन्वयक : प्रा.व्ही.जी.बिरादार, डॉ.म.ई.तंगावार, प्रा.जे.डी.संपाळे

.jpeg)

बहुत सुंदर वर्णन किया हैं
ReplyDeleteबहुत खुब और सही लिखा है।
ReplyDelete